सुबह करीब ७ बजे का समय था. नवल के घर पर उसकी नौकरानी जो की घर के हर काम कराती थी दरवाजे पर आई और डोर बेल बजाई, लेकिन कोई रिस्पोंस ना मिलने की दृष्टि में उसने फिर से डोर बेल बजाई. लेकिन फिर भी कोई रिस्पोंस नहीं आया.
नवल का क़त्ल सस्पेंस स्टोरी ये साहब लोग भी ना कितना सोते हैं कहते हुए नवल की नौकरानी ऋतू ने दरवाजे को हलके से खटखटाया.....अरे यह क्या दरवाजा तो खुला ही है...ऐसा कैसे..अमूमन ऐसा तो नहीं होता है......वह थोड़ी घबराई हुई इधर उधर देखते हुए साहेब...साहेब की आवाज लगाते हुए घर के अन्दर गयी और जब वह किचेन में पहुची तो उसकी चीख निकल पड़ी....वह उलटे पैर तेजी सी बाहर निकली और पड़ोस में रहने वाले रिषभ वर्मा के घर गयी....रिषभ वर्मा के घर से नवल के अच्छे सम्बन्ध थे और वे दोनों पडोसी भी थे.
रिषभ की पत्नी ने दरवाजा खोलते हुआ कहा.....क्या हुआ ऋतू तू इतना घबराई क्यों है...
ओ...ओ साह्रेब किधर हैं...बुलाओ...ऋ तू ने घबराहट में बोला...वह पसीने से टार बतर हो गयी थी.
ओ तो नहीं हैं...लेकिन हुआ क्या वह तो बता....तू इतना घबराई हुई क्यों है....रिषभ की पत्नी दीपिका ने तोड़ा परेशान होते हुए बोला
खु...खून..हो गया है....साहेब और मेमसाहेब का..ऋतू घबराहट में बोली
क्या....किधर दीपिका ने बोला...उसके चहरे के भाव बदल गयी थे.
चलिए मेमसाहेब मई दिखाती हु....यह कहकर ऋतू दीपिका के साथ नवल के घर में आई.
ओह माई गॉड....कितनी बेरहमी से किसी ने क़त्ल किया है......पुलिस को इन्फार्म कराती हूँ...और उसने पुलिस को काल किया...थोड़ी ही देर में पुलिस आ गयी.
नवल का क़त्ल सस्पेंस स्टोरी भाग २ suspense stories
इन्स्पेक्टर तिवारी अन्य सिपाहियों से घर का कोना कोना देखो ....देखो कही कुछ मिलता है क्या
इसे किसी धारदार हथियार से मारा गया है...एक सिपाही ने कहा
इन्स्पेक्टर तिवारी लाशो का मुयायना करते हुए पूछे कि फोन किसने किया था.
सर मैंने किया था...मुझे ऋतू ने बताया....ऋतू यहाँ काम कराती है....दीपिका ने कहा
वैभव जल्दी से एम्बुलेंस को बुलाओ इस औरत की सांस चल रही है.....तिवारी ने एक सिपाही को आवाज देते हुए कहा.
ओके ऋतू तो आप यहाँ काम कराती हैं...क्या नाम इन साहेब का....तिवारी ने ऋतू से पूछा
सर साहेब का नाम नवल आहूजा और यह मेमसाहेब का नाम पद्मिनी आहूजा है...पद्मिनी मेमसाहेब की पत्नी हैं.....ऋतू ने कहा
ओके.....अपने सर को कुछ समझने की स्थिति में हिलाते हुए तिवारी ने इक और प्रश्न किया....आप कब से यहाँ काम कर हैं और इन पति पत्नी का रिश्ता कैसा चल रहा था..कुछ बता सकती हैं आप
जी सर मैं यहाँ २ साल से काम कर रही हूँ...दोनों का रिश्ता बहुत अच्छा चल रहा था...लेकिन इधर कुछ दिनों से दोनों में थोड़ी बहस हो जाती थी....इसी से परेशान होकर मेमसाहेब कहीं बाहर चली गयीं थी और तीन दिन बाद आने वाली थीं...लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था...ऋतू ने कहा और रोने लगी...दीपिका ने उसे गले लाक्गाकर शांत कराया
होनी को मंजूर नहीं था...यह तो होनी को मंजूर करवाया गया...,,लाश की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और पद्मिनी जी के होश में आने पर काफी राज खुलेंगे कि यहाँ क्या हुआ था....तिवारी जी ने कहा.
नवल का क़त्ल सस्पेंस स्टोरी भाग ३ suspense kahaniya
वैभव डाक्टर को फोन लगाओ और पूछो की पद्मिनी जी की तबियत कैसी है....तिवारी ने कहा
ओके सर कहकर वैभव ने फोन लगाया और तिवारी को दे दिया.....हाँ डाक्टर साहब मैं इन्स्पेक्टर तिवारी बात कर रहा हूँ...पद्मिनी जी की तबियत कैसी है..क्या हम उनसे कुछ बात कर सकते हैं.
नहीं सर....अभी उनको आराम तो है...लेकिन उन्हें होश में आने में अभी भी कम से दो घंटे लगेंगे....डाक्ट र ने जवाब दिया
ओके थैंक यू डाक्टर साहेब...पद्मिनी को जैसे ही होश आयी तुरंत ही हमें इन्फार्म करें....तिवारी ने यह कहकर फोन कट कर दिया.
पोलिस थाणे में इस मर्डर पर डिस्कस करते हुए तिवारी ने कहा क्या लगता है..क्या हुआ होगा वहा
सर मुझे तो लगता है कि पद्मिनी ने ही आहूजा का क़त्ल किया है और फिर खुद भी जहर खा लिया . उसकी नौकरानी ने हमें बताया की दोनों में कुछ दिनो से अनबन हो रही थी.....वैभव ने कहा
नहीं वैभव....ऐसा नहीं है....अगर ऐसा था तो दरवाजा क्यों खुला था...तिवारी ने कहा
सर ओ गुमराह करने के लिए भी तो हो सकता है....सब इन्स्पेक्टर शालिनी ने कहा
नहीं शालिनी अगर ऐसा था तो मर्डर में प्रयोग किया गया हथियार कहा गया और पद्मिनी के शरीर पर कोई भी खून के निशाँ भी नहीं थे और पद्मिनी को गुमराह ही करना रहता तो वह जहर क्यों खाती....तिवारी ने कहा
यस सर...यह जहर वाली थ्योरी कुछ समझ में नहीं आ रही है..वैभव ने कहा
आएगी जल्द ही समझ में आएगी वैभव.... अब हमें हॉस्पिटल चना चाहिए ...शायद पद्मिनी को होश आ गया हो.....यह कहकर ओ लोग हास्पिटल के लिए रवाना हो गए.
नवल का क़त्ल सस्पेंस स्टोरी भाग ४ mystery stories
डाक्टर साहेब पद्मिनी की तबियत कैसी है....वैभव ने पूछा
ओ जास्त अभी होश में आई हैं..अब उनकी तबियत खतरे से बाहर है...मैं अभी आपको फोन करने वाली ही थे....डॉक्टर ने उत्तर दिया
कैसी तबियत है पद्मिनी जी....तिवारी ने पूछा, लेकिन पद्मिनी ने कोई भी जवाब नहीं दिया
देखिये हम आपको ज्यादा परेशान नहीं करेंगे....आप कृपया ये बाताइये की आपके पति नवल आहूजा का क़त्ल किसने किया..आपको जहर किसने दिया....आपके घर में कौन आया था...तिवारी ने फिर पूछा
कुछ देर शांत रहने के बाद पद्मिनी रोने लगी.... सर नवल आहूजा का खून मैंने ही किया है....
क्या ....लेकिन वे तो आपके पति थे .....तिवारी ने चौककर कहा
पति....अरे काहे का पति....उसने मुझसे शादी सिर्फ दिखावे के लिए की थी....इस बहाने वह घर में पार्टीज करता और अपने दोस्तों को उनकी वाइफ के साथ बुलाता और फिर मुझे अपनी दोस्तों के हवाले करके उनकी वाइफ्स के साथ गुलछर्रे उडाता था....मैं उसकी इन हरकतों से तंग आ गयी थी.....मैंने कई बार उसे समझाने का प्रयास किया...लेकिन इस पर वह मुझे मारने लगता.....आखिर मैं क्या करती.
उस दिन भी उसने कहा की कल शाम को ऐसी ही एक पार्टी है....अब मैं इससे ऊब चुकी थी..मैं इस जलिलत से मुक्ति पाना चाहती थी....मैं इन पार्टीज की वजह से कहीं बाहर नहीं निकलती थी....उसके दोस्त बेहद अश्लील टिप्पड़ियां करते थे...मैंने उस दिन उससे कहा कि मैं ऐसा नहीं करुँगी तो वह गुस्सा हो गया और मुझे मारने के लिए आगे बढ़ा और मैंने उस पर चाक़ू से वार कर दिया और उसके बाद मैंने चाक़ू को बाहर गार्डन में फेक दिया.....मैं उसके बाद वहाँ से भाग जाना चाहती थी कि तभी मुझे किसी के आने का एहसास हुआ और मैं बेहद डर गयी और पुलिस में जाने के दर से कीटनाशक दवा खा ली....लेकिन मुझे उसे मारने का कोई अफ़सोस नहीं है.
पुलिस में तो अभी भी जाना ही पडेगा आपको.....आपने कानून को अपने हाथ में लिया....तिवारी ने कहा और फिर पद्मिनी को सजा हो गयी.
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