रीना जहां रहती थी, वहां हर कोई दुर्गा पूजा के उत्सव की तैयारी में लगा था। रीना के बड़े भैया का तो बोलबाला था। वह संगीत, नृत्य, गायन व खेलों में हमेशा अव्वल आते थे। वह कॉलेज जाने के बाद इन सबके अभ्यास में अपना वक्त बिताते थे। रीना उन्हें देख-देखकर हमेशा सोचती कि भैया की मोहल्ले में सब लोग जितनी तारीफ करते हैं, काश, मेरी भी उतनी ही तारीफ होती। वैसे रीना की तारीफ होती तो थी, लेकिन केवल पढ़ाई के लिए। वह पढ़ाई में तो खूब होशियार थी, लेकिन कुछ और भी ऐसा करना चाहती थी, जिससे लोग उसके बड़े भैया की तरह उसकी भी तारीफ करें। नन्ही रीना के दोस्तों में कोई फैंसी ड्रेस के लिए तैयारी कर रहा था, कोई सोलो डांस के लिए। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे? वैसे करने को तो बहुत कुछ था, पर वह सबसे अलग कुछ करना चाहती थी। एक दिन वह उसी सोच-विचार में डूबी थी कि रीना के रॉनी भैया ने उसे देखा। उन्होंने प्यार से आकर अपनी नन्ही बहन से पूछा कि वह इतनी उदास क्यों बैठी है? नन्ही रीना तो इसी का इंतजार कर रही थी, क्योंकि भैया को परेशान करने की उसकी हिम्मत नहीं होती थी। उसके भैया इंजीनियरिंग की तैय...