Nice story... रोम में एक बहुत प्रसिद्ध लोहार हुआ। उसकी प्रसिद्धि सारी दुनिया में थी, क्योंकि वो जो भी बनाता था, वो चीज़ बेजोड़ होती थी। उस लोहार की दुकान पर बनी तलवार का कोई सानी न था। और उस लोहार की दुकान पर बने सामानों का सारे जगत में आदर था। दूर-दूर के बज़ारों में उसकी चीज़ें बिकती थीं, उसका नाम बिकता था। फिर रोम पर हमला हुआ। और रोम में जितने प्रतिष्ठित लोग थे, पकड़ लिए गए। रोम हार गया। वो लोहार भी पकड़ लिया गया। वो तो काफ़ी ख़्यातिलब्ध आदमी था। उसके बड़े कारख़ाने थे। और उसके पास बड़ी धन–सम्पत्ति थी, बड़ी प्रतिष्ठा थी। वो भी पकड़ लिया गया। तीस, रोम के प्रतिष्ठित, जो सर्वशक्तिशाली आदमी थे, उनको पकड़ के दुश्मनों ने ज़ंजीरों और बेड़ियों में बाँध के पहाड़ों में फेंक दिया, मरने के लिए। जो उनतीस थे, वो तो रो रहे थे, लेकिन वो लोहार शान्त था। आख़िर उन उनतीसों ने पूछा कि, “तुम शान्त हो, हमें फेंका जा रहा है, जंगली जानवरों को खाने के लिए!” उसने कहा, “फ़िकिर मत करो, मैं हूँ, मैं लोहार हूँ। ज़िन्दगी भर मैंने बेडियाँ और हथकड़ियाँ बनाई हैं, मैं खोलना भी जानता हूँ। तुम घबड़ाओ मत। एक दफ़ा इनको फें...